रखदो चटके शीशे के आगे मन का कोई खूबसूरत कोना ,यह कोना हर एक टुकड़े में नज़र आये गा |

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रविवार, 7 अगस्त 2011

प्यार तो प्यार है
बस उसकी शक्ल बदल गई है

देखो मै तुम्हारे लिए
टूथपिक लाया हूँ
तुम्हारी पसंद के बिस्कुट और नमकीन लाया हूँ
पेपर नैपकीन और अलुमूनियम फायल भी लाया हूँ
जो तुम अक्सर भूल जाती हों

हाँ , पहले तुम दोने में गर्म गर्म जलेबी लातेथे
कुछ मैगजीन भी लाते थे
फिल्म की दो टिकटें भी लाते थे

बावजूद इसके मै जानती हूँ
तुम्हारा प्यार नही बदला
तुम आज भी वैसे ही हों
जैसे तब थे

यू आर माई बेस्ट फ्रैंड

32 टिप्‍पणियां:

  1. सच ही शादी के बाद तो बस घर गृहस्थी की बाते ही याद रह जाती हैं पर शादी के बाद भी कोई इतना कुछ याद रखे तो इसे प्यार ही तो कहेंगें बधाई

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  2. बदलते वक्त के साथ दोस्त का साथ क्या बात है
    फ्रेंडशिप डे पर आपको हार्दिक शुभकामनाये एवं बधाई

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...मे आई से यू आर माई बेस्ट फ्रेंड? इफ यस देन यू आर माई बेस्ट फ्रेंड ओ.के. मेरी अमानत http://cbmghafil.blogspot.com/ पर आइए और दोस्ती पक्की कर लें

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  5. बहुत सुंदर रचना... बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...!

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  6. वक्त बदल गया ..सौगात बदल गयी ..पर कुछ भी है दोस्ती तो है न
    अच्छी प्रस्तुति

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  7. anamika aapne swal poochh kr mujhe romanchit kr diya hai our uska jwab dene me mujhe beintha khushi ho rhi hai .
    ye duniya ka sbse bda sch hai ki ek dost me pti bdi aasani se mil skta hai lekin ek pti me dost milna bhut mushkil our sukhd sthiti hoti hai our es bat ko aap sbhi se sheyar krne me mujhe koi sankoch bhi nhi ho rha hai .
    chndr bhoosan ji mere sbhi blog mitro ki trh aapka bhi istekbal krne me mujhe bdi prsnnta ho rhi hai .
    rchna ji ,suneel ji , prveen ji vivek ji , shashtri ji shrad ji , sngita didi our priy anamika aap sbhi ko apne blog pr dekh kr bhut achchha lga . aise hi sneh bnaye rkhiyga .
    meri dil se dua hai ki mere sbhi blog mitr apne apne ghr me is pak ehsas ko mhsoos kre .
    aameen .

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  8. प्यार का और कोई रूमानी स्वरूप है भी नहीं वह रोमांच और पुलक है ,सौन्दर्य पान,सौन्दर्य वंदना ,सौन्दर्य का गुणगान ,एप्रिशिएशन है ,तवज्जो नहीं है असली प्यार तवज्जो ही है . .हर वह रिश्ता निभ जाता है जिसमें आप सामने वाले की सीमा पहचानते हैं .आपके बिंदास अंदाज़ को सलाम कोटिश :प्रणाम .
    "रूप की आराधना का मार्ग आलिंगन नहीं तो और क्या है ,
    स्नेह का सौन्दर्य को उपहार रस चुम्बन नहीं तो और क्या है ?"यह पहली बात यानी रोमानी प्रेम है ,व्यवहार जगत का प्यार नहीं है .यह तो बस एक पुलक आलोडन है .कवि मन की कसक है खाब है .

    Thursday, August 11, 2011
    Music soothes anxiety, pain in cancer "पेशेंट्स "
    .http://veerubhai1947.blogspot.com/ ( सरकारी चिंता राम राम भाई पर )

    http://sb.samwaad.com/
    ऑटिज्‍म और वातावरणीय प्रभाव। Environment plays a larger role in autism.
    Posted by veerubhai on Wednesday, August 10
    Labels: -वीरेंद्र शर्मा(वीरुभाई), Otizm, आटिज्‍म, स्वास्थ्य चेतना

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  9. बहुत ही खूबसूरती से कह दिया तुमने कि --'तुम एक अच्छी दोस्त हो !''.... और यही तो मै भी कहना चाहती हूँ तुमसे !!!

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  10. कविता बहुत सुन्दर और भावपूर्ण है।

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  11. बहुत अच्छी रचना ....
    समय के साथ-साथ उपहार भी बदल जाते हैं ....

    सब कुछ तो समझ आया पर ये '' अलुमूनियम फायल '' क्या है ...?

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  12. hrkeerat ji
    abhivykti psnd aai shukriya .
    aluminiyam foil ek kism ka paper hota hai jiske andar roti ya our kuchh bhi lpet kr rkh dete hai to vo khane wali cheej thndi nhi hoti hai .

    bhrhal aap shrartn to ye bat poochh nhi rhi hai na ?

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  13. दोस्त होने को
    अपने अलग अंदाज़ में परिभाषित किया आपने
    रचना , प्रभावशाली है
    अभिवादन स्वीकारें .

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  14. Rajwant ji , very sweet creation. I'm loving the simplicity and honesty in it.

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  15. बहुत कोमल अहसास.सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...

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  16. Rajwant ji aapki pichhli पोस्ट्स देखीं bich mein kafi achhi kshnikayein hain .....
    bhejiye न सरस्वती-suman patrikaa ke liye ....
    apni 10,12 kshnikayein , sankshipt परिचय और tasveer ....
    intjaar rahega ....:))

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  17. प्यार बना रहे चाहे जलेबी का दौर हो या टूथपिक का ! सुंदर !

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  18. सुना तो है...
    कुछ भावनाएं
    कभी नहीं बदलतीं ....

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  19. shukriya aap sbhi ka .aise hi sneh bnaye rkhr isse hausla bdhta hai .

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  20. राजवंत जी, आज आप की कविता को दुबारा पढा और कमेंट किये बिना न रहा गया। सचमुच, आपने प्‍यार की गहनता को बहुत गहराई से समझा है।

    ............
    डायन का तिलिस्‍म!
    हर अदा पर निसार हो जाएँ...

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  21. .

    आदरणीया राजवंत राज जी

    ब्लॉग क्या चाहने वालों को तरसाने के लिए बना रखा है ?
    आपकी ख़ूबसूरत कविताओं को पढ़ने की इच्छा ले'कर आने वालों को निराश न करें प्लीज़ !
    कविता निस्संदेह बहुत अच्छी है …
    एकदम सहज और सुग्राह्य !

    इतने अंतराल में बहुत सारे नये अनुभवों के ख़ज़ाने हाथ लगे होंगे … शर्तिया
    तो कुछ लालो-गौहर बांटिये न !
    :)

    घर-परिवार में सबके लिए हृदय से मंगलकामनाओं-शुभकामनाओं सहित…
    राजेन्द्र स्वर्णकार

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  22. aapne shi frmaya rajendra ji , anubhvon ke bhur sare moti hath lge hai . jroor aap sbhi se sanjha kroongi . blog pr aane ke liye dhnywaad .

    zakir saheb blog pr aa kr kvitayen dobara pdhne ke liye bhut bhut shukriya .

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