रखदो चटके शीशे के आगे मन का कोई खूबसूरत कोना ,यह कोना हर एक टुकड़े में नज़र आये गा |

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सोमवार, 10 मई 2010

कदम

 
क्या हुआ जो सडकें नप गईं
तुम्हारे कदमों से .
एक फासला था , तय हो गया 
ख्वाबों में ही सही .

5 टिप्‍पणियां:

  1. वाह इतने कम शब्दों मे पूरी राम कथा !!!

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  2. sht prtisht isi jwab ki umeed thi aap se.puri khri utri . wah , kya bat hai .

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  3. क्या हुआ जो सडकें नप गईं
    तुम्हारे कदमों से .
    एक फासला था , तय हो गया
    ख्वाबों में ही सही ...

    वाह बहुत खूब ......!!

    हाँ ,वो एक बाजारू औरत है .
    हजारों उपलब्धियों की हकदार.....

    राजवंत जी अब जमेगी जोड़ी .....वाह ....स्वागत है आपका .....!!

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  4. ''ab jmegi jodi ''keert inj lgya jive jhppi pa litti hove .

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  5. क्या हुआ जो सडकें नप गईं
    तुम्हारे कदमों से .
    एक फासला था , तय हो गया
    ख्वाबों में ही सही

    waahhhhhh

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