रखदो चटके शीशे के आगे मन का कोई खूबसूरत कोना ,यह कोना हर एक टुकड़े में नज़र आये गा |

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गुरुवार, 27 मई 2010

सच


सख्त हथेली पे कुदरत की दो चीर है  


इक  जिन्दगी की है इक मौत की है ,


मैंने जिन्दगी की चीर को कलम से गहरा रंग दिया 


मौत ने हँस के कहा , तेरी स्याही फीकी है |

8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! कमाल की रचना है, बहुत ही कम शब्दों में गहरी बात!

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  3. राज , ज़िन्दगी का पूरा दर्शन दो चार पंकियों में कह दिया आपने ...बहुत खूबसूरत लिखा सचमुच . दिल से बधाई

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  4. बहुत सुंदर जी,आप ने जो दो लाईनो मै कमाल कर दिया.
    धन्यवाद
    हो सके तो इसे हटा दे Word verification इस का कोई लाभ नही, लेकिन टिपण्णी देने मै दिक्कत आती है

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  5. मैंने जिन्दगी की चीर को कलम से गहरा रंग दिया !!
    इसीलिए आपका नाम राज है ! जिन्दगी के रहस्यों पर अपनी कलम की नोंक रख दीजिये ! शुभ कामना !

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  6. मौत ने हँस के कहा, तेरी सियाही फीकी है ....

    कोई शक नहीं कि मौत का रंग गहरा होता है
    लेकिन इस में भी कोई शक नहीं
    कि ज़िंदगी जी लेने का जज़्बा
    एक अलग ही रंग लिए होता है
    जो आपकी इन पंक्तियों में साफ़ नज़र आ रहा है

    बहुत अच्छी कृति .

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  7. बेहद खूबसूरत !!!!!!!!!!चार लाइनों मे ज़िंदगी का पूरा फलसफा । कमाल है यार !!!

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  8. dosto
    such me kitni takt hai
    ye hme tumse tumhe hmse jodta hai.
    nileshji pragyaji raj saheb muflisji ushajiour shushilaji vkt nikalne ke liye shukriya .

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