रखदो चटके शीशे के आगे मन का कोई खूबसूरत कोना ,यह कोना हर एक टुकड़े में नज़र आये गा |

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गुरुवार, 9 सितंबर 2010

दो टूक बातें ------[निराशा से ]

 एक ----


बेशक मै चौहद्दी की इक ईट हूँ 
मगर बहुत मजबूत हूँ | 
मुझे भेद के घर के आंगन में
तांडव का मन ना बनाओ ,
तुम्हारे हर प्रहार का मुह तोड़ जवाब हूँ
बस ! वहीं  ठहरो , वहीं ठहर जाओ |


दो ---


सुनहरी रेत की तरह
इस पार से उस पार तक
फैली उजली हंसी ने
कमरे में पसरे मौन से पूछा
ये चुप सी क्यों लगी है
अजी ! कुछ तो बोलिए |


तीन ----


ना तुम बुरी हो ना हम बुरे हैं ,
गर हैं  तो ख्यालात बुरे हैं | 
आओ इससे निज़ात पाने की कोशिश करें ,
मै मुतमइन हूँ , सुबह  होगी जरूरहोगी |


चार ----


हाँ ! मुझे उमीदों से मुहब्बत करनी है ,
इस जज़्बे में घुस के मुहब्बत करनी है |
 वो जो कोई बात तेरे लब पे आ के ठहरी है
उसे सरेराह , सरेआम करनी है
ताकि ताकीद रहे  तुम फिर इधर का 
कभी रुख ना करो
हाँ ,  कभी रुख ना करो |




23 टिप्‍पणियां:

  1. निराशा को अच्छी चेतावनी देती रचनाएँ ....

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  2. बहुत ही सुंदर ओर हिम्मत से भरपुर, धन्यवाद

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  3. मै मुतमइन हूँ , सुबह होगी जरूरहोगी |
    jab kavitaon men itana ujaala hoga toh subah kaise nahin hogii ...badhaayii..

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुंदर और सार्थक रचनाएँ..
    आभार ....

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  5. मै मुतमइन हूँ , सुबह होगी जरूरहोगी!!!!!!!!!!!!!!

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  6. आप की रचना 10 सितम्बर, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपनी टिप्पणियाँ और सुझाव देकर हमें अनुगृहीत करें.
    http://charchamanch.blogspot.com


    आभार

    अनामिका

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

    हिन्दी का विस्तार-मशीनी अनुवाद प्रक्रिया, राजभाषा हिन्दी पर रेखा श्रीवास्तव की प्रस्तुति, पधारें

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  8. ना तुम बुरी हो ना हम बुरे हैं ,
    गर हैं तो ख्यालात बुरे हैं |
    आओ इससे निज़ात पाने की कोशिश करें ,
    मै मुतमइन हूँ , सुबह होगी जरूरहोगी |
    kamaal ka likhti hain aap

    उत्तर देंहटाएं
  9. निराशा को इतनी जबदस्त पछाड़ !सलाम करती हूँ !!

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  10. is jzbe me aap sbhi ka sath hai
    isse achchhi our koi kya bat hai
    shukriya .
    arshad bhai aapko our sbhi mitro ko ''eid''ki bhut bhut mubarkbad .

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  11. बहुत ख़ूबसूरत और शानदार रचनाएँ ! मुझे बेहद पसंद आया!

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  12. निराशा से लडने की प्रेरणा देती रचनायें बहुत अच्छी लगी। बधाई और धन्यवाद।

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  13. आपको एवं आपके परिवार को गणेश चतुर्थी की शुभकामनायें ! भगवान श्री गणेश आपको एवं आपके परिवार को सुख-स्मृद्धि प्रदान करें !

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  14. ना तुम बुरी हो ना हम बुरे हैं ,
    गर हैं तो ख्यालात बुरे हैं |
    आओ इससे निज़ात पाने की कोशिश करें ,
    मै मुतमइन हूँ , सुबह होगी जरूरहोगी
    प्रेरणा देती रचनायें पसंद आई

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  15. तीनों में लडने का ज़ज़्बा है... और खुद पर बेईंतहा विश्वास है..
    कुछ ऎसा कि
    ’उजाला आया था मांगने हमसे रोशनी की भीख
    हम अपना घर न जलाते, तो क्या करते’

    कुछ ऎसा भी -
    ’शाखों से टूट जायें वो पत्ते नहीं हैं हम,
    आँधियों से कह दो जरा औकात में रहें’

    आपके ब्लॉग को फ़ॉलो कर रहा हूँ... आभार!

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  16. wah ! kya bat hai pankaj ji .
    aap sbhi mitro ka hardik dhnyvad our abhinandan .

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  17. उर्जा देती सुन्दर क्षणिकाएं...

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