रखदो चटके शीशे के आगे मन का कोई खूबसूरत कोना ,यह कोना हर एक टुकड़े में नज़र आये गा |

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गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

शर्म आती है

हम उस समाज मै खड़े हैं जहाँ
एक जिस्म के बहत्तर टुकड़े हुए हैं और
कुछ दिनों बाद हम सब आदतन   गायेंगे हैप्पी न्यू इयर 
तेजाब से चेहरे झुलसाये गये है और
हम सब आदतन  गायेंगे  हैप्पी न्यू इयर  
ब्लेड से गले  रेते  गये है और 
हम सब गायेंगे  हैप्पी न्यू इयर
कार मै रौंदी गई हैं अस्मत और 
हम सब गायेंगे हैप्पी न्यू इयर
पालीथीन मै लटकी ज़िंदा मिली है नन्ही जान और 
हम सब आदतन गायेंगे हैप्पी न्यू इयर 
उनसे पूछो जिनके घरों के है ये हादसे 
वो बतलायेंगे उनके लिए सिसकियों मै डूबा 
कैसा होगा आने वाला ये न्यू इयर 
कौन इनके दर्द को महसूस करेगा इकत्तीस की रात को 
सब जो डूबे होंगे जश्न मै इकत्तीस की रात को . 
सच ! मन बहुत दुखी है और 
ऐसे अमानवीय समाज का हिस्सा होने पर 
खुद पे शर्म आती है |

31 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत संवेदनशील ...सच ऐसे समाज का हिस्सा बन शर्म आती है ....
    कैसे कर पाते हैं ऐसा कुकृत्य...

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  2. शर्म आती है किसी की हैवानियत पर ,किसी की बेवफाई पर ,और किसी की कायरता पर ! यही तो हमारा समाज ??? तमाम कोढ़ छिपाए हुए !जो हमारी सम्वेदना को तार तार करता है ! सुंदर अभिव्यक्ति के लिए बधाई !

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  3. इंसानियत को तार करती , विचारणीय, तार्किक, सारगर्भित और जीवन सत्य को अवगत कराती पोस्ट

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  4. आपकी पोस्ट की चर्चा कल (18-12-2010 ) शनिवार के चर्चा मंच पर भी है ...अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव दे कर मार्गदर्शन करें ...आभार .

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  5. इंसानियत को तार करती , विचारणीय, सारगर्भित पोस्ट ,आभार..

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  6. इंसान होकर हिंसक पशुओं के सामान आचरण ।
    दुखद !

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  7. sachai samaj ka baya karti ....sochne ko vivash karti...behad sundar.......badhai ho aapko

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  8. इंसानियत के दोहरे चरित्र पर गहरा आघात. ... सुंदर प्रस्तुति...
    .
    सृजन _शिखर पर " हम सबके नाम एक शहीद की कविता "

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  12. बहुत संवेदनशील प्रस्तुति..समाज के दोहरे मापदंडों पर गहरा कटाक्ष

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  13. इस समाज को न बदल पाने पर शरम आती है ।

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  14. बहुत सुंदर !
    कविता को एक नए अंदाज़ में परिभाषित किया है आप ने !

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  15. ye samaj ka kancer hai............
    aaj doudatee bhagtee jindagee me aaj ka hadsa kal koun yaad rakhe .........
    roz ka hissa ban rah gaye hai ye hadse.........

    samvedansheel prastuti.

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  16. wakai sharm ki baat hai...
    main nahin bhool pati un chehron ko jo dahshat liye chale jate hain , main apne andar jiti chali jati hun

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  17. सचमुच समाज में बहुत बुराइयां हैं ।
    हर वर्ष नव वर्ष से नई उम्मीदें जगती हैं ।
    ज्यादातर अधूरी ही रह जाती हैं ।

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  18. आपका ब्लॉग "उम्मीद" बहुत पसंद आया है!
    तारीफ के लिए शब्द नही है!

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  19. मैं आपके ब्लाग को फालो कर रहा हूँ । आप भी कृपया मेरे ब्लाग एक्टिवे लाइफ को फालो करें. धन्यवाद.

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  20. बहुत संवेदनशील प्रस्तुति, समाज के दोहरे मापदंडों पर गहरा कटाक्ष|

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  21. बिल्कुल सही कह रही है आप। जैसा कि मैने अपने पोस्ट में लिखा है कि हमलोग मैं पर ज्यादा ध्यान देने लगे है हम पर नहीं। जबतक कोई हादसा हमारे साथ नही होता तब तक हम उसके प्रति उदासीन बने रहते है। उस पर अपनी प्रतिक्रिया देते है उसमें गलतियॉं निकालते है और उसे भूल जाते है। मेरे पोस्ट को सराहने और मेरे ब्लाग पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रगुजार हुॅ।आशा है आपका प्यार इसी तरह से मुझे मिलता रहेगा। धन्यवाद।

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  22. इक-इक शब्द हकीकत है -कि शर्म आती है ---
    --
    पंख, आबिदा और खुदा

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  23. बहुत संवेदनशील, कड़वा सच है ये!
    राजवंत जी, आपकी टिप्पणियां मिलती रहती है, बहुत धन्यवाद आपका, आप को पूरा अधिकार है कुछ भी कहने का, मुझे आप लोगों के स्नेह और मार्गदर्शन की ज़रूरत है!

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  24. "मेर्री क्रिसमस" की बहुत बहुत शुभकामनाये !

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  25. insaniyat ko yad dilane ka andaz bahut achcha hai. dard ko jagane ka prayas naya vars men rah ka kam karegee.
    www.nature7speaks.blogspot.com

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  26. आदरणीय RAJWANT RAJ जी
    नमस्कार
    समाज में जो कुछ भी होता है उसका वर्णन आपने बखूबी किया है ..एक के पंक्ति सत्य से भरपूर है ..बहुत सुंदर कविता

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  27. सब जो डूबे होंगे जश्न मै इकत्तीस की रात को .
    सच ! मन बहुत दुखी है और
    ऐसे अमानवीय समाज का हिस्सा होने पर
    खुद पे शर्म आती है |
    xxxxxxxxxxxxxxxx
    बिलकुल सच है .....ऐसा अक्सर होता है और हम फिर भी भीड़ का हिस्सा बनना स्वीकार करते हैं ...बहुत विचारणीय कविता ...धन्यवाद

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  28. aadrneey sangeeta di , usha ji , rchna ji , prveen ji , suneel ji , anupma ji , divya ji , upendr ji kailash ji , nivedita ji sanjay ji , rashmi di , dral saheb , raj purohit ji , ahsas ji amit ji nilesh ji , neelam ji kewal ji aap sbhi ka bhut bhut shukriya ki aap mere vicharo se shmt hai our blog pr aa kr hausla afjai bhi krte hai .hardik dhnyvwaad .

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