रखदो चटके शीशे के आगे मन का कोई खूबसूरत कोना ,यह कोना हर एक टुकड़े में नज़र आये गा |

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बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

चाहत

एक लोटा पानी और उसमे
समंदर की चाहत
ये कैसा दिल है!
ज़िन्दगी के चन्द  लम्हे
मुट्ठी में आसमाँ 
ये कैसी चाहत है!
एक सांस में दुनिया की
सारी ख़ुश्बू
अजीब पागलपन है!
छोटा सा गुलदस्ता
ढेर सारे सपने
ये क्या हम है?










 







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