रखदो चटके शीशे के आगे मन का कोई खूबसूरत कोना ,यह कोना हर एक टुकड़े में नज़र आये गा |

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बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

मशाल

एक मशाल तुम्हे चाहिए
जलाने के लिए
एक मशाल मुझे चाहिए
बुझाने के लिए
देखे इस नफरत और
मोह्हबत की जंग में
कौन मिटता है
क्या मिटाने के लिए






5 टिप्‍पणियां:

  1. gahri rachana..
    kuchh uljha kuch suljha ..

    Hindi blog ki dunia me swagat.

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  2. Yaqiinaan jeet muhabbat ki hogi!ap koshish jari rakhiye. zyadatar log aap ke hi sath hain.

    Meraj Ahmad
    Reader Deptt. of hindi, AMU Aligarh
    Webpage:
    http://samaysrijan.blogspot.com
    http://swarsrijan.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. bahut sahee....bahut sunder
    kalam ki mashal jalti hai jagane ke liye
    sakhti se thame rahna.

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  4. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
    कलम के पुजारी अगर सो गये तो
    ये धन के पुजारी
    वतन बेंच देगें।



    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में प्रोफेशन से मिशन की ओर बढ़ता "जनोक्ति परिवार "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ ,

    उत्तर देंहटाएं
  5. अच्‍छी लगी आपकी रचना .. इस नए चिट्ठे के साथ हिन्‍दी चिट्ठा जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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